• Hemant Kumar

बीइंग भगीरथ ने शहरी विकास मंत्री को भेंट किया “आई लव हरिद्वार”


कोरोना के इस कठिन समय और लॉक डाउन में बीइंग भगीरथ मिशन ने शहर को एक और तोहफा दिया है मिशन के युवाओं ने मिलकर हमेशा की तरह खुद से ही सारी सामग्री जोड़कर हरिद्वार शहर को आई लव हरिद्वार की कलाकृति बनाकर भेंट की है यह कलाकृति प्रेम नगर आश्रम के पुल पर लगाई गई है आज इसका उद्घाटन हरिद्वार के विधायक व शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक के द्वारा किया गया।



बीइंग भगीरथ मिशन के संयोजक शिखर पालीवाल ने बताया की हमारा प्रयास शहर की सुंदरता में चार चांद लगाने का है इसी क्रम में पहले मिशन ने भगत सिंह चौक पर वर्टिकल गार्डन स्थापित किया था जिसमें इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक की बोतलें गमलों के रूप में सजाई गई थी और अब इसकी अगली कड़ी में हम लोगों ने वेस्ट पड़े हुए लोहे से यह आई लव हरिद्वार की कलाकृति बनाई है इसमें भी हमने पौधे लगाए हैं और इसको इस तरह से बनाया गया है किस के आगे खड़े होकर लोग सेल्फी ले सकें बैकग्राउंड में आई लव हरिद्वार के साथ ही गंगा मैया का मनोरम नजारा फोटो में आ सके।

मंत्री जी ने कहा की बीइंग भगीरथ मिशन का शहर को सुंदर बनाने का प्रयास काबिले तारीफ है इन युवाओं की जितनी प्रशंसा की जाए कम है और इन युवाओं में सबसे अच्छी बात यह है की अपने सारे सभी काम यह लोग अपने स्तर से बिना किसी सरकारी मदद के करते हैं।

अभी कोरोना की महामारी के समय भी बीइंग भगीरथ मिशन ने लॉक डाउन के पहले दिन से रसोई चलाकर लगभग दो लाख जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाया।

शुभम विश्नोई व विपिन सैनी ने बताया की जिस तरह आजकल निराशाजनक समय चल रहा है लोगों में हताशा निराशा का माहौल है ऐसे समय में हम लोगों ने यह कलाकृति अपने शहर के लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का प्रचार हो इसलिए अपने शहर को गिफ्ट की है।

अंकित शर्मा वह राहुल गुप्ता ने बताया की हमारी टीम के युवा हरिद्वार वह गंगा मैया की स्वच्छता व सुंदरता के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। मोहित शर्मा व वेणु त्यागी ने बताया की हरिद्वार जोकि विश्व की अध्यात्मिक राजधानी कही जाती है जहां पर हर 12 साल में कुंभ का मेला लगता है ऐसे हरिद्वार को सुंदर बनाने के लिए बीन भगीरथ मिशन से जो भी संभव प्रयास हो सकते होंगे वह किए जाएंगे। गौरतलब है की बीन भगीरथ मिशन एक पूर्णतया गैर सरकारी संस्था है इसके द्वारा किए जाने वाले सभी कार्य इसके स्वयंसेवी स्वयं अपने संसाधनों से ही करते हैं

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