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समय की पुकार “पोषण गृह वाटिका”

भारत एक विशाल शील देश है और इसकी अधिकांश जनसँख्या शाकाहारी है। प्राप्त आंकडों के अनुसार अभी भी प्रति व्यक्ति सब्जियों का उपयोग संस्तुत को गयी मात्रा से काफी कम है(220 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) आज भी काफी महिलाये एवं बच्चे कपोषण के शिकार। सब्जिया हमारे भोजन को स्वादिष्ट, पौष्टिक एवं संतुलित बनाने में सहायक होती है,इनके माध्यम से मानव शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स खनिज लवण, विटामिन एवं अमीनो एसिड आदि प्राप्त होते है।

बाज़ार में उपलब्द सब्जिया एवं फल आम तौर पर ताज़े नहीं होते है। इसके अलावा महंगे भी होते है। उस में मौजूद रोगाणुओ एवं हानि कारक रसायनों की उपस्थिति के कारण स्वस्थ्य को क्षति होने का भय बना रहता है। अत: हम अपने खाने के लिए सब्जियों को अपने घर के आस पास अथवा घर मे गृह वाटिका के रूप में उगाये, गृह वाटिका से कुछ हद्द तक परिवार के सभी सदस्य जुड़ सकते है। बड़े शहरों में जहा जमीन की उपलब्धता नहीं है वहा गमलो या टेरिस पर कुछ चुनिदा सब्जियों एवं फलो को सुगमत्य पूर्वक उगाया जा सकता है।


गृह वाटिका बनाते समय निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए:

  • गृह वाटिका हेतु खुली धुप एवं हवादर छाया रहित स्थान या घर के पीछे दक्षिण दिशा सर्वोत्तम माना गया है

  • अच्छे जल विकास वाली दोमट मिटटी इस के लिए उपयुक्त होती है

  • सिंचाई का उचित प्रबंध होना चाहिए और गृह वाटिका जल स्त्रोत के पास होनी चाहिए

  • गृह वाटिका का आकार एवं माप स्थान की उपलब्धता फल एवं सब्जियों की आव्यश्यकता और समय की उपलब्धता आदि पर निर्भर करता है। वेसे चोकोर आकार की गृह वाटिका सर्वोत्तम मानी गयी है।

  • यदि गृह वाटिका का निर्माण खुली जगह में करने जा रहे है तो उसके चारो और लकड़ी या बांस आदि का बाड (फ़ेन्स) बनानी चाहिए

  • क्यारियों में गोबर की खाद या जैव उर्वरको का उपयोग करें

  • मिटटी को 10-15 से.मी.गहराई तक खुदाई करें,कंकड़,पत्थर आदि निकाल मिटटी को भुरभुरा बना ले,अव्यश्यकता अनुसार क्यारियों को लगाने से पूर्व जैवफफूंदीनाशो व जैव कल्चर से उपचारित कर ले:

  • उचित दूरी पर बनी पंक्तियों में बोआई / रोपाई करें

  • क्यारियों अव्यश्यक्तानुसार सिंचाई करें

  • क्यारियों में अनेक खरपतवार उगा जाते है जो पौधों के अत: अव्यश्यक्तानुसार निराई – गुडाई करते रहे

  • कीट एवं रोगों से पौधों बचाने के लिए नीमयुक्त एवं जैविक दवाइयों का भी उपयोग भी करें

  • उपलब्ध स्थान का अधिक से अधिक उपयोग करने हेतु वैस वाली सब्जियों जैसे लौकी,सीताफल,तोरई,करेला,खीरा अदि को दिवार के साथ उगाकर छत या बाढ के ऊपर ले जाए

  • मूल वर्गीय सब्जियों जेसे गाजर,मूली,चुकुन्दर,शलगम को गृह वाटिका की क्यारियों मेड़ो के ऊपर ही उगाये

गृह वाटिका में उगाये जाने वाली सब्जिया एवं फल


ग्रीष्म कालीन सब्जिया (बोआई का समय: जनवरी-फरवरी भिन्डी, टमाटर, मिर्च, लौकी, करेला, टिंडा, खीरा, तोरई, खरबूजा, तरबूजा, लोबिया, चौलाई, ग्वार, राजमा, बेंगन आदि


वर्षाकालीन सब्जिया ( बोआई का समय : जून- जुलाई) भिन्डी, टमाटर, बेंगन, मिर्च, शिमलामिर्च, खरीफ प्याज, अगेही फूलगोबी, पालक, मूली एवं कद्दुवार्गीय सब्जिया आदि


शरद कालीन सब्जिया (बोआई का समय: सितम्बर-नवंबर) गाजर, मूली, आलू, मटर, पालक, मेथी, धनिया, सौफ, शलगम, फूलगोभी (मध्या पछेती, बंदगोभी, गांठगोभी, ब्रोकली, सलाद, प्याज, लहसून, बांकला, सरसों-साग, बथुआ आदि।


उपरोक्त सब्जियों के अलावा गृह वाटिका में कुछ छोटे बहु वर्षीया पौधे भी लगाने चाहिए जैसे निम्बू, अनार, केला, करोंदा, अंगूर, करीपत्ता, सहजन, सतावर, अमरुद आदि।


गमलो व डिब्बो की वाटिका

यदि घरो में पौधे उगाने की कोई जगह उपलब्ध नहीं है तो वहां कुछ चुनिन्दा सब्जियों को दिब्बो व गमलो में उगाया जा सकता है। गमलो और डिब्बो में मिटटी,खाद व रेत भर मिर्च, फ्रेंच बीन, मेथी, पालक, चौलाई, बथुआ, धनिया, टमाटर, लोबिया, लहसुन आदि को उगाया जा सकता है।


गृह वाटिका हेतु आवश्यक सामग्री

कृषि यन्त्र: खुरपी,फावड़ा,दरांती,बाल्टी,सुटली बांस या लकड़ी का डंडा,एक छोटा स्प्रयेर

बीज: गृह वाटिका में थोड़ी भूमि के अंदर अधिक से अधिक उत्पादन देने हेतु बीज या पौधे को विश्वसनीय संस्था से ही खरीदे।

पौध:अधिकांश सब्जियों की पौध तेयार करने के बाद रोपाई की जाती है,पौधशाला में पौध तेयार करके या संस्था से पौध खरीद कर वाटिका में रोपाई करनी चाहिए।


खाद एवं उर्वरक

गृह वाटिका में सदेव गोबर की खाद,कम्पोस्ट,वर्मी कम्पोस्ट का ही उपयोग करना चाहिए।

यदि उर्वरक का उपयोग करना हो तो नीमलेपित यूरिया का उपयोग करना चाहिए।


कीट एवं रोगों की रोकथाम

गृह वाटिका में कटी एवं रोगों का प्रकोप होता है जिन के कारण उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों पर प्रतियुक्त प्रभाव पड़ता है,पौधो के प्रभावित भागो को काट कर मिटटी में दबा देना चाहिए,साथ ही जेविक कीटनाशको या फफुन्दिनाश को उपयोग करना चाहिए।


सब्जिया तेयार होने के बाद उनको उचित तोड़ाई करके उपयोग करना चाहिए। उचित प्रभंधन व देखभाल के साथ गृह वाटिका के अन्दाताज़ी पोष्टिक स्वादिष्ट एवं सुरक्षित सब्जिया पैदा करके अल्प लाभ उठा सकते है,इस प्रकार गृह वाटिका हमारी खाद सुरक्षा का विकल्प हो सकती है।

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