• Kanika Chauhan

ओ... “कोरोना”, चाइनिज वायरस…


ओ... “कोरोना”, चाइनिज वायरस… य़ूं लेकर जिंदगियां हट्टा कट्टा हुआ जाता तू? छिन हर गली, हर नुक्कड़ की रोनक, अपना दायरा रोज बढ़ाता तू। गलियों की वो बारातें, वो खुबसुरत शामें... सुना सबकुछ कर दिया, छिन कर रोनक बाजारों की समय को जैसे थाम दिया। छिन स्कूल, कॉलेज की वो मस्ती दोस्ती में जहर क्यों मिलाता है, बंद कर ऑफिस, फैक्टरी, देश की आर्थिक स्थिति क्यों गिराता है। कर बेरोजगार लाखों को घर पर तूने बिठाया है, छिन गरीबों से निवाला.. भूखा उनको सूलाया है। बदल रोज अपने रंग-ढ़ग, दायरा अपना बढ़ाता तू दिन-रात पुलिस को खड़ा कर सड़को पर, फिर अपने को खोने का डर बढ़ाता तू। पंछी पेड़ों से पूछ रहे.. इस शहर का इंसान कहां है, क्या हुआ जो सन्नाटा और सुनसान यहां है.. कहता हर किसान यहां है, खेतों पर फसल तैयार है... मैं तो हूं किसान, लेकिन लॉकडॉउन से परेशान ओ-चाइनीज वायरय तूने ये क्या हाल दुनिया का बना दिया..

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