• Kanika Chauhan

मां-बाप के लिए Aadhar Card उनके बच्चे

जब रामकिशन लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। दूसरी शादी की लाख कोशिशों के बाद भी उनका एक ही जबाव होता था नहीं... वो हमेशा यह कहकर मना कर दिया करते थे कि पुत्र रमेश के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी।


जब रामकिशन का पुत्र वयस्क हुआ तो उन्होंने अपना पूरा कारोबार अपने रमेश के हवाले कर दिया। और वह खुद कभी अपने ऑफिस तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। फिर जब रमेश की शादी हुई तो और भी ज्यादा निश्चित होकर पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया।


अभी तो रमेश की शादी को एक वर्ष ही हुआ था कि एक दिन जब रामकिशन दोहपर में खाना खा रहे थे और रमेश भी लंच करने ऑफिस से घर आकर हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था। तभी उसने सुना कि पिता जी ने नेहा मेरी पत्नी से खाने के साथ दही माँगा और उसने जवाब दिया कि आज घर में दही नहीं है। इस पर पिताजी ने बिना कुछ कहे खाना खाया और ऑफिस चले गये।


थोडी देर बाद जब रमेश, नेहा के साथ खाना खाने बैठा तो खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। उसने उस समय तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और चुपचाप खाना खाकर वह भी ऑफिस चला गया।


कुछ दिन बाद रमेश ने अपने रामकिशन से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका विवाह होने जा रहा है।’’


रामकिशन ने आश्चर्य से रमेश की तरफ देखा और कहा-‘‘रमेश यह क्या कहते हो.. मुझे पत्नी की आवश्यकता नहीं है और मैं तुझे इतना स्नेह देता हूँ कि शायद तुझे भी माँ की जरूरत नहीं है, फिर दूसरा विवाह क्यों?’’

रमेश ने सर छुकाते हुए कहा कि ‘‘ पिता जी, न तो मैं अपने लिए माँ ला रहा हूँ न आपके लिए पत्नी, मैं तो केवल आपके लिए दही का इन्तजाम कर रहा हूँ।


कल से मै किराए के मकान में नेहा के साथ रहूँगा तथा आपके ऑफिस में एक कर्मचारी की तरह वेतन लूंगा ताकि आपकी बहू को दही की कीमत का पता चले।’’


यह सुन रामकिशन ने रमेश को गले से लगा लिया। पिताजी को समझाते हुए रमेश ने कहा कि जब माँ-बाप हमारे लिए ATM कार्ड बन सकते है तो,हम बच्चे उनके लिए Aadhar Card तो बन ही सकते है।

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