• Kanika Chauhan

सौदा

इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। झुमकी श्रृंगार स्टोर जिसे मेरे पति ने मेरे नाम पर खोला था। आज एक नया जोड़ा आया है मेरे दुकान पर। स्टाफ ने बताया कि सुबह से दूसरी बार आए हैं। एक कंगन इन्हें पसंद है पर इनके हिसाब से दाम ज्यादा है। इन्हें देख इस दुकान की नींव, मेरा वजूद और अपनी कहानी याद आ गई।

ऐसे ही शादी के बाद पहली बार हम एक मेले में साथ गए थे। मुझे काँच की चूड़ियों का एक सेट पसंद आया था। तब आठ रुपये की थी और हम ले ना पाए थे। ये बार-बार पाँच रुपये की बात करते मगर उसने देने से मना कर दिया। मुझे वो चूड़ी ना दिलाने का अफसोस मेरे पति को ज़िंदगी भर रहा था। क्यूंकि उस दिन मैं पहली बार उनके साथ मेले में गई थी और कुछ पसंद किया था। उस दिन इनके जेहन में इस दुकान की नींव पड़ गई थी। इतना प्रेम करते थे मुझसे कि फिर कभी कुछ माँगना ही ना पड़ा। मेरी खुशियों के लिए रात-दिन एक कर दिया। ये सब याद कर मेरी गीली आँखे इनके फूल चढ़े तस्वीर की तरफ गई जिसके शीशे में ये जोड़ी नज़र आ रही थी।

“सर! सुबह ही कहा था कि हजार से कम नहीं होगा” “चलिये ना, कोई बात नहीं! फिर कभी ले लेंगे” दोनों सीधे-साधे गाँव के लग रहे थे बिल्कुल जैसे हम थे। लड़की मेरी ही तरह स्थिति समझ रही है और लड़के में इनके जैसा उसे दिला देने की ललक और ज़िद्द। इस प्यार को मैं महसूस कर रही थी “एक बार और देख लीजिए ना अगर सात सौ तक भी..!” “एक ही बात कितनी बार बोलूं सर, नहीं हो सकता” जैसे मैं इनका हाथ लिए मेले की उस दुकान से वापस जा रही थी और ये मायूस हो कदम वापस ले रहे थे। ये जोड़ा भी दुकान से बढ़ने ही वाले थे “रुकिए आप लोग! कौन सा कंगन पसंद है।” “ये गोल्डेन और रेड वाला मैम।”

स्टाफ ने कहा “इस पर तो कल ही फिफ्टी पर सेंट डिस्काउंट लगाने बोला था तुमको।”

“कब बोला था मैम”?

“अच्छा! लगता है मैं भूल गई थी..

जी ये अब पाँच सौ का ही है, आप ले जाइए।

लड़के की खुशी देख मुझे महसूस हो रहा था कि उस दिन ये भी ऐसे ही खुश होते स्टाफ मुझे ऐसे देख रहा था जैसे आज पहली बार मैंने घाटे का सौदा किया हो। पर उन्हें क्या पता खुशियों का सौदा नहीं होता।

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