• Kanika Chauhan

हमसफर

बस बहुत हुआ अब और नहीं..

गुस्से मे आई निशा ने टेबल पर रखी फोटो उठाकर फोन लगाया..

दो रिंग्स के बाद आवाज आई-हैलो..

निशा- जी मेरी बात मोहनजी से हो रही है ..

जी ..कहिए वहां से आवाज आई ..

निशा- देखिए मिस्टर आप जिस लड़की को कल देखने आ रहे है मैं वहीं लड़की निशा बोल रही हूं आपने सुना होगा मेरी पढाई सरकारी नौकरी और घरेलू होने का… मगर एक बात शायद ना पता हो कि मैं सांवली लड़की हूं। अगर आपको भी औरो की तरह चांद जैसी लड़की से शादी की तमन्ना है तो कृपया यहां ना आए। तंग आ गई मैं ये देखा दिखाई से…

शादी जब लड़का लड़की दोनों की होती है तो फिर लड़की की नुमाइश क्यों प्लीज आप ना आए…

कहकर निशा ने फोन काट दिया..

असल में 28 पार होने को आई निशा परेशान थी इस देखा दिखाई से अबतक 17 लड़केवाले उसे देखने आए। घरेलू, पढ़ाई और सरकारी नौकरी का सुनकर तो आ आते मगर उसका रुप सांवला देखकर बताएंगे कहकर लौट जाते इससे उसके परिवार कि उम्मीदें टूटती।

मां बाबूजी अधिक दहेज देकर भी निशा की शादी को तैयार थे मगर सबकुछ तो ठीक रहता जैसे बात दिखाई की होती निशा का सांवला पन देखकर ना नुकुर हो जाती….

निशा अपने पिता और मां और छोटी बहन को अक्सर अकेले रोते देख वो भी रोती थी और आज जब मां ने बताया कल उसे लड़केवाले देखने आ रहे है तो…टेबल पर लड़के की फोटो और मोबाइल नम्बर भी है बस निशा को हरबार होती नुमाइश याद आने लगी और गुस्से मे उसने मोहन को खूब सुना दिया..

सुबह की ऑफिस निकली निशा जब शाम को घर लौटी तो पूरा परिवार खुश था और उसके आते ही उसका मुंह भी मीठा करवा दिया जब निशा ने वजह पूछी तो पता चला कल जो लड़केवाले आनेवाले थे उन्होने संदेशा भिजवाया है कि उन्हें लडकी पसंद है और वो कल नहीं बल्कि सगाई वाले दिन ही आएंगे अगर निशा की हां हो तो..

वैसे आप लड़कीवाले जब चाहे आ सकते है…हमारी और से रिश्ता पक्का…तो मुंह मीठा करना तो बनता है ना…अब तू बता तेरा क्या फैसला है निशा ने मुसकराते हां में सिर हिला दिया।

मां ने कहा- जल्दबाजी की जरूरत नहीं एकबार लड़के से मिल तो लो…

निशा- मां..मैं उनसे मिल ली… आज लंच टाइम में वो ऑफिस आए थे बहुत मिलनसार है कहनेलगे वो मुझे देखने नहीं बल्कि खुदको मुझे दिखाने आए है क्योंकि शादी लड़का लड़की दोनों की होती है तो देखा दिखाई केवल लड़की की क्यों…फिर सुबह फोन पर हुई बातें मां पिताजी को बता दी और बोली – मां उन्होने कहा उन्हें कोई दहेज नहीं बल्कि एक घरेलू लड़की चाहिए जो कि उनकी तरह अपने सास ससुर को मां बाप का आदर सम्मान दे…और बदले में मैं तुम्हारे माता पिता को कभी किसी भी मोड पर बेटे की कमी महसूस नहीं होने दूंगा..

मां मुझे जैसा जीवनसाथी चाहिए था मोहनजी बिल्कुल वैसे ही है कहते निशा शर्माकर मां के गले लग गई…

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