• Kanika Chauhan

सब रिश्तों से ऊपर होती है ‘दोस्ती’

दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता जो बाकी सब रिश्तों की कमी पूरी कर दे,

दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता जो भले ही खून का न हो पर उससे कई बढ़ कर हो जाए,

दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता जो दिमाग से नहीं दिल से निभाया जाए,

दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता जो ज़माने की बंदिशों को तोड़ कर निभाया जाए!!

हम सबके पास ज़िदंगी में कुछ हो या न हो, पर दोस्त जरूर होता है। यकिन माने तो वो सभी लोग बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें दोस्ती निभाने का मौका मिलता है। अजीब इत्फाक है ये कि दो लोग जो शायद पहले ज़िदंगी में कभी न मिले हो वो ऐसे दोस्त बन जाते हैं जिन से मिले बगैर जिदंगी अधूरी सी लगने लगती है।

आज कल की ज़िदंगी में यूं तो हमारे बहुत से दोस्त बनते है कुछ खास होते हैं तो कुछ बस नाम के, कुछ मतलबी तो कुछ काम के पर इन सभी लोगों में से ऐसा दोस्त मिलना जो सौदा नहीं सच्ची दोस्ती करे बहुत मुश्किल होता है। देखा जाए तो दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है जो हर दायरे से परे होकर निभाया जाता है। दोस्त छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, अफसर हो या कर्लक आखिर दोस्त तो दोस्त ही होता है। इसलिए ये कहना बिल्कुल ग़लत नहीं होगा कि दोस्ती हर रिश्ते को रिपलेस कर सकती है पर दोस्ती को शायद कोई रिश्ता रिपलेस नहीं कर सकता।

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