• Kanika Chauhan

रूहानी मिलन की बात…!

राजू उपाध्याय

ध्वंस में थोड़े सृजन की, बात होनी चाहिये। तमस में नन्हीं किरन की,बात होनी चाहिये।

यदि सम्वेदना सर्द हों, और औंधी पड़ीं हो, ऐसे में थोड़ी तपन की, बात होनी चाहिये।

आँसू के दर्दीले बादल,जब नैनो में बसते हों, फिर तो सुनहरे सपन की,बात होनी चाहिये।

कोई दर्द हद से बढ़े ,एहसास भी मीठा लगे, तब उपचार में जलन की, बात होनी चाहिये।

प्यास अधरों पर धरी हो इक नदी हो सामने, इन्ही क्षणों में आचमन की,बात होनी चाहिये।

माना देह से परे है ,प्रेम का पावन फलसफा, तो फिर रूहानी मिलन की,बात होनी चाहिये।

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