• Kanika Chauhan

रोजाना 10 मिनट का योग आपको रखेगा एक्टिव

योग से न सिर्फ आपका शरीर फिट रहता है बल्कि मस्तिष्‍क भी हमेशा एक्टिव रहता है। रोजाना योग करने आपकी थकान (Fatigue) दूर होती है और सुस्‍ती छूमंतर हो जाती है। योग आपको कई गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। योग से कैंसर, हार्ट अटैक, डायबिटीज और कई लाइफस्‍टाइज डिजीज होने की संभावन खत्‍म हो जाती है। नियमित रूप से योगाभ्‍यास करने से व्‍यक्ति में उर्जा का संचार होता है, जिससे दिनभर मोटिवेट रहता है। 

आज हम आपके लिए ऐसे योगासन लेकर आएं हैं जो आपके शरीर को फ्लैक्‍सीबल रखेगा। रीढ़ की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ पेट की चर्बी को भी खत्‍म करने में मदद करेगा। इसके अलावा बीमारियों के होने की संभावना को कम करेगा। आइए, इस लेख उन योग के बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन

सुप्त मत्स्येन्द्रासन (Supine Spinal Twist Pose) योगासन बहुत ही आसान योग क्रिया है। इसे आप अपने बेड पर लेटकर भी कर सकते हैं। यह आपकी रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को 180 डिग्री के कोण पर या कंधों की सीख में रखें। अब दायें पैर को घुटनों से मोड़ें और ऊपर उठाएं और बांये घुटने पर टिकाएं। अब सांस छोड़ते हुए दायें कुल्‍हे को उठाते हुए पीठ को बाईं ओर मोड़े और दायें घुटने को जमीन पर नीचे की ओर ले जाएं। इस दौरान आपके दोनों हाथ अपनी जगह पर ही रहने चाहिए। आपके सिर का डायरेक्‍शन बायीं ओर रहेगा। य‍ही क्रिया आपको बाएं पैर के साथ करनी है। इस क्रिया को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं। इससे आपकी पीठ, नितंब, रीढ़ और कमर की हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होंगी।

पवनमुक्‍तासन

पवनमुक्‍तासन (Wind Relieving Pose) बहुत ही लाभदायक योग क्रिया है। इसे करना बहुत आसान है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं, यह सुनिश्चित करें कि आपके पैर एक साथ हैं, और आपके हाथ आपके शरीर के बगल में रखे हैं। एक गहरी सास लो, जैसे ही आप सांस छोड़ते हैं, अपने घुटनों को अपनी छाती की ओर लाएं, और अपनी जांघों को अपने पेट पर दबाएं। अपने हाथों को अपने पैरों के चारों ओर इस तरह जकड़ें जैसे कि आप अपने घुटनों को टिका रहे हों। 

हर बार जब आप सांस छोड़ते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप घुटने पर हाथों की पकड़ को मजबूत करते हैं, और अपनी छाती पर दबाव बढ़ाते हैं। हर बार जब आप सांस लेते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपने पकड़ ढीली कर दी है। इस अवस्‍था में सांस लें और छोड़े। सबसे आखिर में आप अपने माथे को घुटनों में टच कराएं अगर संभव हो तो। इसे आप 1-1 मिनट के लिए 3 से 5 बार कर सकते हैं। इससे आपका पाचनतंत्र बेहतर रहेगा। कब्‍ज की समस्‍या नहीं होगी। रीढ़ को मजबूती मिलेगी।

वक्रासन ं

वक्रासन (Wind Relieving Pose) को बैठकर किया जाता है। इसमें आपका मेरूदंड सीध में होता है। इसे करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं और मेरूदंड को सीध में रखें। अपने दोनों हाथों को आंखों की सीध में सामने हाथ पंजों को जोड़ें सांस अंदर लेते हुए दायीं तरह जाएं और सांस छोड़ते हुए वापस पूर्व की मुद्रा में आएं। अब यही क्रिया बायीं ओर करनी है। इसे आप 3 से 5 बार करें। इसे करने में जल्‍दबाजी न दिखाएं। इस आसन को करने से आपका लिवर, किडनी, पेनक्रियाज पर असर पड़ता है और आपके ये अंग निरोगी होते हैं1 स्पाइनल कार्ड मजबूत होती है। हर्निया के रोगियों को भी इससे लाभ मिलता है।

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