• Kanika Chauhan

मेरा वो मतलब नहीं था…

नेहा कितना टाईम लगेगा?? जल्दी करो न ट्रेन का समय हो रहा है.. साहिल ने नेहा को आवाज

गाते हुए कहा..

बस आ गई दो मिनट..

कब से दो मिनट नहीं हुए तुम्हारे….

ओफो.. आप भी न साहिल.. कमरे से आती हुए नेहा ने कहा… आ गई बाबा…

चलो, अब जल्दी वरना हमारी ट्रेन छुट जाएगी.. तुम्हें दिल्ली का ट्रैफिक तो पता ही है… साहिल ने लगेज उठाते हुए कहा….

नेहा और साहिल की शादी अभी-अभी हुई थी। नेहा चाहती थी वो अपने हनीमून पर किसी पहाड़ी जगह पर जाए और साहिल ने भी उसकी इच्छा को ध्यान में रख कर हनीमून पर पहाड़ों की रानी मसूरी जाने का इंतजाम कर लिया था। दोनों आठ साल से एक साथ और अब उनकी शादी घर के सभी बड़ों की रजामंदी से हुई थी। उन दोनों के साथ परिवार के सभी लोग भी बहुत खुश थे।

देखा तुमने कितना ट्रैफिक था आज…साहिल ने कैब से उतरते हुए नेहा से कहा…

हां, साहिल सच में…

दोनों स्टेशन पर पहुंचे ही थे कि ट्रेन की अनाउंसमेंट होने लगी। दोनों ने जल्दी से जाकर ट्रेन पकड़ ली थी…

नेहा हस्ते हुए साहिल से बोली आज तो मजा ही आ गया…किस तरह हमने ट्रेन पकड़ी…

दोनों अपनी सीट पर बैठे बात कर रहे थे और सभी लोग नेही को देख रहे थे क्योंकि वो अभी नई दुल्हन थी।

ट्रेन चली ही थी कि तभी साहिल के फोन पर उसके पापा का फोन आया…

हैलो..साहिल बेटा कहा हो तुम लोग, स्टेशन टाइम से पहुंच गए थे न…

जी, पापा.. हम टाइम से पहुंच गए थे.. ट्रेन चल पड़ी है सुबह तक हम देहरादून पहुंच जाएगे।

ठीक है बेटा.. अपना और बहु का ध्यान रखना…

ठीक है पापा आप भी अब सोे जाइए.. बहुत देर हो गई है…कह कर साहिल ने फोन रख दिया।

अभी सूरज निकला ही था कि दोनों देहरादून पहुंच गए थे.. नेहा बहुत खुश थी क्योंकि वो अपनी सबसे पसंदीदा जगह पर साहिल के साथ हनीमून पर आई थी।

साहिल ने पहले से ही देहरादून ले मसूरी जाने के लिए कार बुक की हुई थी। कार समय से स्टेशन पर आ चुकी थी।

हैलो सर… गुड मॉर्निग सर… गुड मॉर्निग मैम…होटल के रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने दोनों का स्वागत किया। और उनके रूम की चाबियां उनको दे दी।

नेहा इतनी खुश थी कि उस से अब इंतजार नहीं हो रहा था वो अब पहाड़ों की रानी का दीदार करना चाहती थी। इसलिए आज साहिल से पहले ही तैयार हो गई थी। कार होटल के बाहर खड़ी थी पर नेहा का दिल था कि वो आज बस से मसूरी का दीदार करे तो न चाहते हुए भी साहिल को भी उसकी बात माननी पड़ी।

बस थोड़ी दूर चली ही थी कि तभी आवाज आई….

ड्राईवर भाईया.. बस रोको.. बस रोको… नेहा ने जोर से ड्राईवर को आवाज लगाते हुए कहा…

बस रूकी और दोनों उतर गए…

नेहा और साहिल अपना हनीमून इंजॉए कर रहे थे कि तभी बहुत जोर की आवाज सुनाई दी। पीछे मुड़ के देखा तो पहाड़ का एक बड़ा सा हिस्सा उस बस पर आ गिरा था जिसमें वो दोनों अभी थोड़ी देर पहले सफर कर रहे थे।

साहिल ने धीरे से कहा.. काश की हम उस बस में होते…

इस पर नेहा गुस्से से बोली.. साहिल तुम पागल हो क्या तुम्हें पता भी क्या बोल रहे हो??? क्या तुम मेरे साथ खुश नहीं हो या तुम मेरे साथ आना नहीं चाहते थे..क्या तुम मेरे से प्यार नहीं करते…

तुम्हारी ये ही बात मुझे पसंद नहीं है… तुम बात को पूरी सुने और समझे ही उसका अर्थ निकाल लेती हो, नेहा की बात पर साहिल ने जबाव देते हुए कहा…

मेरे कहने का मतलब वो नहीं था जो तुम समझ रही हो… मैं तो बस ये कहना चाहता था कि अगर हम उस बस में होते तो बस रूकती ही नहीं और जब बस रूकती नहीं तो इस हादसे का शिकार भी नहीं होती।

साहिल की बात सुन कर नेहा को अपनी ग़लती का एहसास हो गया था…

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