• Kanika Chauhan

मेरी माँ

माँ है मेरी सोनपरी, क्या कहूँ वो है बुलबुल मेरी। कुछ कहूँ उन्हें तो वो मरी, ना कहूँ तो मैं मरी।

क्या कहूँ उनके बारे में, उनके दिल में तो ममता भरी। माँ है मेरी सोनपरी। जुबान की है वो पुरी खरी, बड़ी लाजवाब है उनकी कारीगरी।

प्रेम का दूसरा नाम, त्याग का दूसरा नाम ही तो माँ है मेरी…..। माना थोड़ी पगली सी है, पर अच्छी ही तो, माँ है मेरी।

थोड़ी भोली ,थोड़ी पागल ऐसी ही तो माँ है मेरी।

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