• Kanika Chauhan

मंदिर की सीढ़ियों से आती संगीत की ध्वनियां

दक्षिणी भारत के राजराजा चोल द्वितीय द्वारा तमिलनाडु में कुंभकोणम के पास दारासुरम में बनवाया गया मंदिर एरावतेशर मंदिर हिंदू मंदिर है। यह मंदिर यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर घोषित किया गया। यही वो मंदिर है जिसकी सीढ़ियों पर अगर पैर से हल्का सी भी ठोकर लग जाने से संगीत की ध्वनियां निकलती हैं। मंदिर के आंगन के दक्षिण पश्चिमी कोने में 4 तीर्थ वाला एक मंडपम है। जिनमें से एक पर यम की छवि बनी है।

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव को यहां ऐरावतेश्वर के रूप में जाना जाता है क्योंकि इस मंदिर में देवताओं के राजा इंद्र के सफेद हाथी एरावत द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई थी।

मंदिर की एक-एक चीज़ बेहद खूबसूरत और आकर्षक है। इसे देखने के लिए वक्त के साथ ही साथ समझ भी चाहिए। मंदिर के पत्थरों पर की गई नक्काशी बहुत ही शानदार है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर को मनोरंजन के लिए बनाया गया था।

मंदिर के स्तंभ 80 फीट ऊंचे हैं। सामने के मंडपम का दक्षिणी भाग पत्थर के बड़े पहियों वाले विशाल रथ के रूप में है जिसे घोड़े खींच रहे हैं। आंगन के पूर्व में नक्काशीदार इमारतों का समूह है। जिनमें से एक बलिपीट कहा जाता है मतलब बलि देने का स्थान। बलीपीट की कुर्सी पर एक छोटा मंदिर है जिसमें गणेश जी की छवि है। चौकी के दक्षिणी तरफ शानदार नक्काशियों वाली 3 सीढियों का समूह है।

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