• Kanika Chauhan

​बेटी से माँ का सफ़र!!

बेटी से माँ का सफ़र.. बेफिक्री से फिकर का सफ़र रोने से चुप कराने का सफ़र उत्सुकत्ता से संयम का सफ़र

पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी। आज किसी को आँचल में छुपा लेती हैं। पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी। आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती हैं।

पहले जो छोटी छोटी बातों पे रो जाया करती थी आज बो बड़ी बड़ी बातों को मन में छुपाया करती हैं।

पहले भाई…दोस्तों से लड़ लिया करती थी। आज उनसे बात करने को भी तरस जाती हैं।

माँ,माँ कह कर पूरे घर में उछला करती थी। आज माँ सुन के धीरे से मुस्कुराया करती हैं।

10 बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था। आज 7 बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती हैं।

खुद के शौक पूरे करते करते ही साल गुजर जाता था। आज खुद के लिए एक कपडा लेने को तरस जाया करती है।

पूरे दिन फ्री होके भी बिजी बताया करती थी। अब पूरे दिन काम करके भी काम चोर कहलाया करती हैं।

एक एग्जाम के लिए पूरे साल पढ़ा करती थी। अब हर दिन बिना तैयारी के एग्जाम दिया करती हैं।

ना जाने कब किसी की बेटी किसी की माँ बन गई। कब बेटी से माँ के सफ़र में तब्दील हो गई …..

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