• Kanika Chauhan

बड़प्पन – भाई! तू सच में बड़ा हो गया

मायके आई बेटी अपनी मां को बड़ी ही हैरानी से देख रही थी। मां बड़े ही ध्यान से आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थीं। दाल, रोटी, सब्जी और रायता। फिर झट से फोटो खींचकर व्हाट्सप्प करने लगीं।

बेटी बोली- मां! ये खाना खाने से पहले फोटो लेने का क्या शौक हो गया है आपको?

मां- अरे वो तेरा भाई, बेचारा! इतनी दूर रहकर हॉस्टल का खाना ही खा रहा है। कह रहा था कि आप रोज लंच और डिनर के वक्त अपने खाने की तस्वीर भेज दिया करो और उसे देखकर हॉस्टल का खाना खाने में मुझे आसानी रहती है।

बेटी ने शिकायत की- क्या मां! लाड़-प्यार में आपने भाई को बिगाड़ रखा है। वो कभी बड़ा भी होगा या बस ऐसी फालतू की जिद करने वाला बच्चा ही बना रहेगा।

फिर बेटी ने खाना खाते ही झट से अपने भाई को‌ फोन लगाया- भाई! तूने मां की ये क्या ड्यूटी लगा रखी है? इतनी दूर से भी मां को तकलीफ दिए बिना तेरा दिन‌ पूरा नहीं होता है क्या?

भाई- अरे नहीं दीदी! ऐसा क्यों कह रही हो। मैं क्यों करूंगा मां को परेशान?

बेटी- तो मेरे प्यारे भाई! रोज-रोज मां से ये लंच और डिनर की फोटो क्यों मंगवाते रहते हो? दीदी की शिकायत सुनकर भाई हंस पड़ा।

फिर कुछ गंभीर स्वर में बोला- दीदी! पापा की मौत, तुम्हारी शादी और फिर मेरे हॉस्टल जाने के बाद अब मां अकेली ही तो रह गई हैं। पिछली बार छुट्टियों में जब मैं घर आया था तो कामवाली आंटी ने बताया कि मां किसी-किसी दिन तो कुछ भी नहीं बनाती हैं। चाय के साथ ब्रेड खा लेती हैं या बस खिचड़ी। पूरे दिन अकेले उदास बैठी रहती हैं। तब उन्हें रोज ढंग का खाना खिलवाने का मुझे यही एक तरीका सूझा। मुझे फोटो भेजने के चक्कर में दो टाइम अच्छा खाना बनाती है और फिर खा भी लेती है। और फिर इस व्यस्तता के चलते ज्यादा उदास भी नहीं होती है।

जवाब सुनकर बेटी की आंखें छलक आईं। रूंधे गले से बस इतना ही बोल पाई- भाई! तू सच में बड़ा हो गया है।

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