• Kanika Chauhan

परीलोक जैसी खूबसूरत और मन को मोह लेने वाली एक घाटी

फूल हमेशा से ही सबको इपनी और आकर्षित करते रहे हैं। चाहे फूल कोई भी हो देखने में हमेशा ही सुदंर लगता है… फूलों के खुबसूरत रंग और रंगों में रंगा आस-पास का क्षेत्र मन को मोह लेता है। दुनिया में न जाने कितने ही फूल है और उनके अपने – अपने रंग।। हर रंग मानो जैसे कुछ कह रहा हो।

अगर आपको भी फूलों से प्यार है आप भी उनकी खुबसूरती के दिवाने है तो उत्तराखंड की वादियों में फूलों की घाटी आपको इंतजार कर रही है। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित सन् 1982 में इसको भारत का एक राष्ट्रीय उद्यान है घोषित किया था, जो 87.50 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। यूनेस्को ने नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। इस घाटी में अलग-अलग फूलों की 500 से अधिक प्रजातियां हैं।

ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में राम-रावण युद्ध में घायल लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी खोजते हुए हनुमान यहां तक आ गए थे। उन्हें संजीवनी बूटी यहीं के पहाड़ों पर मिली थी। आपको बता दें कि कहा जाता है कि फूलों की इस खूबसूरत घाटी का पता सबसे पहले ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ और उनके साथी आर एल होल्डसवर्थ ने वर्ष 1931 में लगाया था। वह अपने कामेट पर्वत के अभियान से लौट रहे थे।

नवम्बर से मई महीने तक इस घाटी पर पूरी तरह बर्फ की चादर बिछी होती है। साल के बाकी दिन यहां रंग-बिरंग खूबसूरत फूल खिले मिलते हैं। जून में जब बर्फ पिघलने की शुरुआत होती है तो यह क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। जुलाई तक यहां के पौधों में फूल महकने लग जाते हैं। अगस्त में फूलों की घाटी सबसे सुंदर नजर आती है क्योंकि इस दौरान फूल पूरी तरह खिल चुके होते हैं लेकिन अक्टूबर से फूल धीरे-धीरे मुरझाने शुरू हो जाते हैं।

इस खुबसूरत फूलों की घाटी तक पहुँचने के लिए चमोली जिले का अन्तिम बस अड्डा गोविन्दघाट 275 किमी दूर है। जोशीमठ से गोविन्दघाट की दूरी 19 किमी है। यहाँ से प्रवेश स्थल की दूरी लगभग 13 किमी है जहाँ से पर्यटक 3 किमी लम्बी व आधा किमी चौड़ी फूलों की घाटी में घूम सकते हैं।

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