• Kanika Chauhan

नौकरी छोड़ कमा रहे लाखों रूपए

Updated: May 24

क्या पता था यूं बदल जाएगी जिदंगी.. जहां नहीं कमापा रहे थे 10 हजार आज कमा रहे हैं 1 लाख रूपए महीना। यूपी के मेरठ में रहने वाले आदेश की कहानी कुछ ऐसी ही है। वो आज से पांच वर्ष पहले प्राइवेट नौकरी कर रहे थे पर उसमें वो महीने के 10 हजार भी नहीं कमा पाते थे। तभी उन्होंने फैसला किया नौकरी छोड़ कर खेती करने का और उन्होंने औषधीय पौधे सतावर की खेती करनी शुरु कर दी। खेती करने के बाद उनकी किस्मत ऐसी पलटी की आज वो महीने के 1 लाख रूपए कमा लेते हैं।

मेरठ के दयालपुर के रहने वाले आदेश कुमार एग्रीकल्चर में पोस्ट ग्रेजुएट हैं, पीजी करने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरु की, जहां उनकी सैलरी 7 हजार रुपये से शुरु हुई, करीब पांच साल तक उन्होंने इस कंपनी में नौकरी की, लेकिन इन पांच सालों में उनकी सैलरी बढ़कर भी 10 हजार रुपये तक नहीं पहुंच पाई।

आदेश बताते हैं कि नौकरी के दौरान ही उसने देखा कि बाजार में औषधीय पौधे सतावर की जबदस्त डिमांड है। आपको बता दें कि सतावर का इस्तेमाल विभिन्न दवाइयों को बनाने में किया जाता है, इस दौरान उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग के बारे में पता चला, उन्होंने नौकरी छोड़ मुरादाबाद के एग्री क्लिनिक, एग्रीबिजनेस से ट्रेनिंग लेकर एक ट्रेंड एग्रीपेन्योर बन गए।

सतावर को ए ग्रेड का औषधीय पौधा माना जाता है, इस की फसल करीब 18 महीने में तैयार होती है, सतावर की जड़ से दवाएं तैयार होती है, इससे 18 महीने बाद गीली जड़ प्राप्त होती है, फिर इसे सुखाया जाता है, तो इसका वजन घटकर एक तिहाई हो जाता है, अगर आप 10 क्विंतलजड़ प्राप्त करते हैं, तो सुखाने के बाद ये केवल तीन क्विंतल ही रह जाती है, फसल का दाम जड़ों की क्वालिटी पर निर्भर करती है, सतावर की खेती से अच्छी खासी इनकम होती है।

आदेश कुमार ने ट्रेनिंग पूरी करनेके बाद एक सरकारी बैंक से पांच लाख रुपये लोन लिया और सतावर की खेती शुरु की। बाजार से सतावर के बीज खरीदे और खेत में बुआई कर दी। सतावर की एक एकड़ में 20-30 क्विंटल की पैदावर होती है, और बाजार में एक क्विंतल की कीमत 50 से 60 हजार रुपये है।

आदेश कुमार आज अपने इलाके के किसानों को सतावर की खेती के बारे में बताते हैं, उन्हें प्रशिक्षण देते हैं, वो किसानों को उपज को कमीशन पर बाजार में बेचते हैं, इसके लिए उन्होंने नेशनल ऑर्गेनिक्स फर्म की शुरुआत की है, इसके अलावा बायो फर्टिलाइजर का भी निर्माण करते हैं, जिससे अच्छा-खासा इनकम हो जाता है।

सरकार की मदद से आदेश अपने गांव में एक कृषि सेवा केन्द्र चलाते हैं, उनका कहना है कि ये एक सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था है, वो गांव-गांव घूमकर किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच करते हैं, किसानों को इसकी रिपोर्ट भी हाथों-हाथ दे देते हैं, और इसके लिए वो 100 रुपये चार्ज लेते हैं। दिनभर में वो 10 से 15 सैंपल की जांच कर लेते हैं, आदेश बताते हैं कि वो अपने बिजनेस से सलाना 10 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं।

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