• Kanika Chauhan

धुंआ ख्वाहिशें..

राजू_उपाध्याय

मेरा मीत आज हुआ कुछ,बावला सा है । शायद मन कहीं, कुछ छला छला सा है।

उजड़ा जब नशेमन झोंके के इक दम से , दिल की बस्ती में उठा ज़लज़ला सा है।

सन्नाटों का शोर है मचल गईं बिजलियां, मौसम भी देखिये,हुआ वो सांवला सा है।

सिलसिला चाहतों का कहां पर आ थमा , मलाल और सवाल भी, दिलजला सा है।

दिल उदास-उदास है ,हुई धुआं ख्वाहिशे, ये उनकी नई नजर,सावन मनचला सा है।

बूंद आसमां को छोड़ जमीं से आ मिली, रिश्ता अजब,गोया दिल का मामला सा है।

#slider

0 views

Subscribe to Our Newsletter

  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram