• Kanika Chauhan

दोहरे मापदंड…!!

Updated: May 6

पति ने पत्नी को टोकते हुए कहा,”काजल नौ बरस हो गये है हमारी शादी को। और अब तक कोई फूल नहीं खिला है हमारी बगीया में”…

कोई बात नहीं जी, ईश्वर की शायद यही मर्ज़ी होगी जी क्या कर सकते है हम ….

सूनो जी…. क्यो ना हम अनाथ आश्रम से कोई बेटा या बेटी गोद ले लें जी….

नहीं काजल मुझे अपनी हीं औलाद चाहिए अपना हीं खून हर हाल में …. पराया खून किसी भी हाल में नही।

तुम तो औलाद दे नहीं पायी इतने बरसों में….मैॆ…. मैॆ दूसरी शादी करना चाहता हूं औलाद की खातिर, इसमेॆ मुझको तुम्हारी अनुमति चाहिए कानून की खातिर….

कैसी… कैसी बात करते हो जी आप… मेरे से मन भर गया है क्या आपका। जो औलाद के बहाने सौतन लाने की बातें कर रहे हो आप…

मैं…मैं… हरगिज…हरगिज भी अपनी सौतन लाने नहीं दूंगी आपकों….

सोच लो काजल….. फिर मेरे भी पास और कोई चारा नहीं है। तुमसे तलाक के सिवाए…..

ठीक है जी…. मेरे पास तुम्हारी बात मानने के अलावा और…. और कोई रास्ता भी नहीं है।

मगर… मगर मेरी भी एक शर्त हैं….. हम दोनों डाक्टर से चेकअप करवा लेतें हैं। अगर मुझमें कमी होगी….. तो फिर मैं खुद हीं आपका सेहरा सजाउंगी जी….

यें हुई ना सहीं बात….. मुझको मंजूर है काजल तुम्हारी ये शर्त…

रुको जी रुको….. इतनी जल्दी नहीं….. पहले पूरी बात तो सुन लो पूरी बात…..अगर मुझमें कमी नही निकली और…. और आप में निकली तो फिर????…

तो…. तो फिर…. फिर क्या गोद ले लेंगे…..नहीं….. फिर गोद क्यों…..

मुझको भी अपना हीं खून चाहिए वो भी अपनी हीं कोख से….आप मुझको दूसरा पति लाने देंगे ना इस घर में औलाद की खातिर….ठीक वैसे ही जैसे आप दूसरी पत्नी लाना चाहतें हैं।

पागल हो गयी हो क्या…. कैसी बातें कर रही हो तुम… दिमाग घूम गया है क्या तुम्हारा…

दिमाग नहीं घूमा है मेरा, अलबत्ता पिछले नौ बरस के अपने वैवाहिक जीवन के रिश्ते/पल जरूर घूम रहे हैं मेरे दिमाग़ मैं….

सुनो… सुनो… तुम सुनो…. मैं अभी इसी वक्त… इसी पल से अपने रिश्ते को आपसे विच्छेद कर रहीं हूं…. नहीं रखना है मुझको आप जैसे मतलबी और स्वार्थी हमसफर से कोई भी रिश्ता….


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