• Kanika Chauhan

दुनिया को समझाओ पापा, बेटियां बोझ नहीं होती

“पापा सुनो न… मुझे भी जीना है, दुनिया को देखना है…मां… मैं तो आपका ही अंश हुं मुझे इस दुनिया में आने दो न…”

एक तरफ जहां देश में डिजिटल की बात करते हैं, नए जमाने में जीने का दावा करते हैं…. नई-नई तकनीकों को अपनाना चाहते है… वहीं दूसरी तरफ ऐसा सोचने वाले…एक खाटिया सोच भी रखते हैं कि उनके घर बेटी का जन्म एक गलती है… वो उनके परिवार पर बोझ है। जहां देश में सब कुछ डिजिटल की बात कर रहे हो वहीं ऐसी सोच भी रखते हो।

बॉलीबुड के नामी गायकों, कलाकारों द्वारा गाया गया ये गाना “लड़कों कि तरह लड़की भी मुठ्ठी बांध के पैदा होती है……” बेहद खुबसुरत गाना है जो पूरी तरह से बेटियों को समर्पित है। गाने के द्वारा कपिल सिबल ने एक खुबसुरत संदेश दुनिया तक पहुंचाया है लेकिन अब सवाल तो ये खड़ा होता है इसको समझा कितने लोगों ने है। देखा तो सबसे होगा..सुना भी होगा… तारिफें भी खुब की होगीं… सोशल मीडिया पर खुब शेयर, लाइक भी किया होगा…. पर ये भी सच है यह सब सिर्फ सोशल मीडिया तक ही रह गया। इस संदेश को अपनी जिदंगी में समझने की जब बात आई तो लोगों ने अपने कान, आंख बंद कर ली।

क्यों बेटियों को जन्म से पहले ही मार देते हैं या उनके जन्म लेते ही किसी नाले में, कूड़े में या यूं ही बहार फेंक देते है…. दुनिया को जन्म देने वाली औरत को ही क्यों इतने दर्द देती है ये दुनिया। जन्म लिया तो मार दी गई और अगर जन्म ले लिया तो दंरिदों के हाथों उनकी हब्स का शिकार हो गई। न जाने इस तरह की कितनी ही विडियो, खबरें सोशल मीडिया पर रोजाना देखने को मिल जाती है…. न जाने कितनी ही ऐसी खबरें रोजाना देखने को, सुनने को मिलती हैं कि आज यहां एक बच्ची मिली आज वहां एक बच्ची मिली। कैसा दिल होता है उन मां-बाप को जो अपने ही बच्चे को यूं ही कहीं भी फेंक देते हैं। क्या उस मां में ममता नहीं होती….क्या ऐसे ही करता है हमारा समाज दुनिया को जन्म देने वाली औरत का स्वागत…

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