• Kanika Chauhan

कॉलेज का आखिरी दिन!!

डगर देखती थी इस दिन की कब से, आगे के सपने रखे थे न जाने कब से… बड़े उताबले थे यहां से जाने को, जिदंगी की अगली मंजिल पाने को पर न जाने क्यों? दिल में आज कुछ और आता है!!

समय रूक जाए यह जी चाहता है, जिन बातों को लेकर रोते थे… आज उन पर हंसते हैं, रहा करते थे बड़ी मस्ती के साथ, यूं ही तीन साल चले गए!! पर आज क्यों लगता है कि कुछ पीछे रह गया…

कैटीन में मस्ती किस के साथ करूंगी, वो हसीन पल अब मैं किसके साथ जीऊंगी!! वो दोस्त कहां मिलेंगे, जो हर पल लड़े पर फिर भी मेर साथ हर मुश्किल में खड़े, वो बेवजह की बातों पर रूठना मानना, वो घंटों फोन पर बातें बनाना, वो बसों के धक्के, वो रास्तों के किस्से!!

न जाने ये फिर कब होगा, मेरी खुशी में सच में खुश कौन होगा.. मेरे गम में मुझसे ज्यादा दुखी कौन होगा, कह दो दोस्तो!! ये दोबारा कब होगा… कह दो दोस्तो!! ये दोबारा कब होगा..

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