• Kanika Chauhan

क्यों दूसरों के हाथ में है हमारे मन का रिमोट??

राधा बिना कुछ बोले जल्दी-जल्दी काम कर रही थी। सुरेश जी समझ गए थे आज राधा का मूड ऑफ है । क्या हुआ बच्चों? मम्मी का आज मूड ऑफ है। पता नहीं पापा, जब से दोपहर से आई हैं तब से किसी से बात ही नहीं कर रही। हां, जब काम जल्दी-जल्दी करने लग जाती है तो समझ लो गुस्से में कर रही हैं सुरेश ने हंसते हुए कहा, ” क्या हुआ, क्या बात है?”

सब पार्क में बैठी थी, “सब पूछने लगे कल शादी की सालगिरह पर क्या किया? मैंने कह दिया कि ऑफिस से देर से आये थे। इसलिए कुछ घर पर ही मंगा कर खा लिया था। सब कहने लगे यह दिन भी कोई ऐसी साधारण सा बिताने का है और मुझे चार बातें सुना दी। हम तो हर बार नये होटल जाते हैं।

अरे तो तुम कह देती कि जैसा समय होता है सब वैसे ही करते हैं। खाने-पीने का क्या है? वह तो हम शनिवार रविवार को वैसे ही कहीं ना कहीं चले ही जाते हैं।

पर सब तो हमें कंजूस समझ रहे होंगे ना ! ओ हो ! तुम दूसरों की बातों में क्यों आ जाती हो? हमारा जो मन आए हम वो करें। दूसरों की बातों को इतना ध्यान देने की जरूरत नहीं है। राधा उठकर काम में लग गई।

तभी राधा की सहेली का फोन आया और राधा एकदम हंस कर बात करने लगी। जैसे ही वो बात कर के फोन रखती है सुरेश जी पूछते हैं अब क्या हुआ? बड़ी खुश हो!

अरे सामने वाली गीता का फोन था कह रही थी कि कल तुमने चुडियां कहां से ली? “मुझे भी वैसी ही लेनी है। देखा बहुत तारीफ कर रही थी मेरी चुड़ियों की, मैंने कह दिया जब दिल्ली गई थी तब ली थी। सुरेश जी और बच्चे मुस्कुराऐ, “चलो तारिफ सुनकर मुड़ तो बदला।”

अगले दिन शाम को सुरेश घर आते ही बोले, राधा जरा चाय बना देना सर में बहुत दर्द हो रहा है.. क्यों आज काम ज्यादा था क्या? राधा ने किचन से ही पूछा…

अरे नहीं काम तो ज्यादा नहीं था, पर लोगों का क्या है? लंच में सब साथ में थे। सब ने पूछा कि सागर का एडमिशन तुमने कहा कराया? मैंने स्कूल का नाम बताया तो सब कहने लगे अरे वह स्कूल तो बेकार है। आपका डिसीजन गलत रहा। मैंने उन्हें समझाया कि वह हमारे घर के पास है और पढ़ाई बहुत अच्छी है। तो उन्होंने स्कूल की 10 कमियां निकाल दी। शहर के सबसे अच्छे स्कूल में कराते। तब से मन इसी बात से परेशान है कि कहीं हमने गलत डिसीजन तो नहीं ले लिया।

आप भी दूसरों की बातों में आ गए। जरूरी नहीं टाप के स्कूल में ही पढ़ाई अच्छी हो। ये स्कूल की पढ़ाई ,फीस सब सही लगी तभी तो कराया। छोड़ो आप ये सब बात! लो, चाय पीओ। लोगों का काम है कहना, टेबल पर चाय रखते हुए राधा ने कहा…

सागर घर में क्या कर रहा है? जाओ बाहर जा कर खेल लो। नहीं ,मम्मी मैं नहीं जाऊंगा?

क्यों?

सब दोस्त कह रहे थे, तेरे पास स्केट्स नहीं है। सब स्केट्स चला रहे हैं।

अरे स्केट्स की जगह पर बैट बॉल भी तो है। तब तुम कह सकते थे कि मेरे पास बैट बॉल है पर स्केट्स तो नहीं है। तो उनके पास भी तो बैट बॉल नहीं है।

हमेशा मूड ऑफ करने करके घर में बैठने की जरूरत नहीं है सागर। हर चीज, हर एक घर में नहीं हो सकती। जो तुम्हारे पास है वह उनके पास भी तो नहीं है।जाओ बैट बॉल ले जाओ।

तभी थोड़ी देर बाद कमरे से राधा के सास, ससुर बाहर आ गए। और मुस्कुराते हुए बोले क्या बात भाई आज सागर का मूड ऑफ है।

सुरेश बोला “पिता जी आप कहीं जा रहे हैं क्या?”

हां ,सोचा समाज से तुम्हारे मन का रिमोट लेकर आते हैं। उनकी बात सुन कर सभी हंसने लगे। राधा ने मुस्कराते हुए पूछा क्या मतलब पिता जी?

सब सुन लिया हमने कल से हम दोनों इस बात को देख रहे हैं। सुरेश की माता जी ने हंसते हुए कहा कि तुम सबके मन का रिमोट शायद दूसरों के पास ही है।

मतलब यह ,कल राधा का बुराई करने से मूड ऑफ हो गया, तारीफ करने से ऑन। और यही सुरेश के साथ हुआ आज स्कूल वाली बात पर और अब वही सागर कर रहा है, तो मुझे लगता है कि मुझे तुम लोगों का रिमोट यहां लाकर रखना पड़ेगा।

लोग तो कहेंगे ही लोगों का काम है कहना! तुम उनकी बातों पर ध्यान नहीं मत दो। तुम्हें क्या पसंद है? तुम क्या करना चाहते हो और तुम्हें क्या अच्छा लगता है वो करो न कि वो जो लोग कहते हैं। पिताजी औऱ माताजी की बात सुन कर सभी यह निर्णय लेते हैं ना कि हम पड़ोसियों को सोच कर अब से अपना मुड ऑफ नहीं करेगें।

राधा ने हंसकर कहा सही कहा पिताजी ने अब से मैं बिल्कुल भी किसी की बात पर ध्यान नहीं दूंगी और जो मुझे सही लगेगा वो ही करूंगी। मेरा कहीं जाना या ना जाना उन पर निर्भर नहीं है। क्यों भई, समझ में आया सुरेश… सुरेश के पिताजी ने हंसकर बोला जी पिताजी..

सब हंसने लगे। चलो अब गरमा गरम चाय बना कर लाओ राधा, सब मिलकर पीते हैं।

दोस्तों ऐसा ही होता है। हम अकसर दूसरों की बातों से अपना मुड खराब रखते है और उसका गुस्सा अपने परिवार पर निकालते है। लोग क्या कहेगें.. क्या सोचेगें इसी सब के बारे में सोचते रहते हैं, जिसका असर लोगों पर नहीं, हम पर ही होता है। यह ऐसा रोग है जिसका नाम है लोग क्या कहेंगे? जो अकसर आपको परेशान कर देता है इस रोग को दूर करने के लिए केवल आपके मन का रिमोट आपके ही हाथ में होना चाहिए दूसरों के हाथ में नहीं।

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