• Kanika Chauhan

कर्ज वाली लक्ष्मी

पापा… पापा… सूनो दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहें हैं अभी जीजाजी का फोन आया था। बड़ी बहन सीमा की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई ही थी कि अब उसके ससुराल वाले आ रहे हैं।

पहले से ही उदास बैठे दीनदयाल जी यह सुन कर धीरे से बोले.. हां बेटा.. उनका कल फोन आया था कि वो दो दिन में दहेज की बात करने आ रहे हैं। बोल रहे थे कि आपसे दहेज के बारे में जरुरी बात करनी है।

बड़ी मुश्किल से अच्छा लड़का मिला है। कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज्यादा हुई कि मैं उसे पूरा नहीं कर पाया तो…. इतना कहते हुए दीनदयाल जी चुप हो गए और उनकी आंखें भर आई।

घर के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रहीं थी। सीमा भी उदास हो गयी…

खैर अगले दिन समधी आए.. घर के सभी सदस्यों ने उनकी खूब आवभगत की। कुछ देर बैठने के बाद राकेश के पिता, सीमा के पिता से बोले दीनदयाल जी अब काम की बात करते हैं…

दीनदयाल जी की धड़कने बढ़ हई और बोले हां.. हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें…

राकेश के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी की तरफ खिसकाई और धीरे से उनके कान में बोले.. दीनदयाल जी मुझे दहेज के बारे में बात करनी है।

दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुए आँखों में पानी लिए हुए बोले बताइए समधी जी… जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा… तभी समधी जी ने दीनदयाल जी के हाथ अपने हाथों से दबाते हुए बस इतना ही बोले कि आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे… थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है… पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं…

क्योंकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी “कर्ज वाली लक्ष्मी” मुझे स्वीकार नहीं है। मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए, जो मेरे घर आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी।

समधी की बात सुन कर दीनदयाल जी हैरान हो गए। उनसे गले मिलकर बोले.. समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा..

#slider

0 views

Subscribe to Our Newsletter

  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram