• Kanika Chauhan

एक पिता की प्रार्थना दामाद से

माँ की ममता का सागर ये, मेरी आँखों का तारा है ! कैसे बतलाऊँ तुमको , किस लाड प्यार से पाला है !!

तुम द्वारे मेरे आए हो, मैं क्या सेवा कर सकता हूँ ! ये कन्या रूपी नवरत्न तुम्हें, मैं आज समर्पित करता हूँ !!

मेरे ह्रदय के नील गगन का, ये चाँद सितारा है ! मैं अब तक जान ना पाया था, इस पर अधिकार तुम्हारा है !!

ये आज अमानत लो अपनी, करबद्ध निवेदन करता हूँ ! ये कन्या रूपी नवरत्न तुम्हें, मैं आज समर्पित करता हूँ !!

इससे कोई भूल होगी, ये सरला है , सुकुमारी है ! इसकी हर भूल क्षमा करना , ये मेरे घर की राजदुलारी है !!

मेरी कुटिया की शोभा है, जो तुमको अर्पण करता हूँ ! ये कन्या रूपी नवरत्न तुम्हें , मैं आज समर्पित करता हूँ !!

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