• Kanika Chauhan

एक अनकहा सा एहसास !!

ज़िंदगी में हमें न जाने ऐसे कितने लोग मिलते है जिनसे एक अनकहा सा connection होता है जिनसे एक राबता सा बन जाता है। न वो हमारे दोस्त होते हैं और न ही वो हमारे खून के रिश्तेदार… न वो, वो होते है जिनसे शायद हम शादी करें, मगर अंदर से उनसे एक जुड़ाव होता है, एक अनकहा एहसास होता है….कभी स्कूल में मिल जाते हैं, कभी बस की साथ वाली सीट पर, कभी रेलवे टिकट की लाइन में शायद, कभी उस ऑफिस में जहां Interview देने गए थे या फिर Client की Meeting के दौरान, या Courier की Delivery के दौरान शायद या वो आपकी दुकान पर कुछ लेने आई थी। उसकी किसी बात में उसकी मुस्कान में पता नहीं किसमें पर एक बहुत गहरा सा जुड़ाव महसूस होता है।

पता है क्या होता है अंदर से एक तार सा हिल जाता है कुछ जुड़ा-जुड़ा सा महसूस होता है। वो बहुत अच्छा लगता है इतना अच्छा की वक्त उसके साथ बह जाता है और उसके बिना ठहर जाता है, मगर ये सब होने के बावजूद हम उससे कुछ भी कहने से कतराते हैं, उसे ये बताने से खिद को रोकते हैं कि क्यों इतना अच्छा लगता है, पता है क्यों?? क्योंकि सवालों का एक पहाड़ हमारे सामने खड़ा होता है जिनका जवाब ढुड़ते-ढुड़ते एक जीवन भी कम पड़ जाए….तुम उसके लगते क्या हो..??क्या रिश्ता है तुम दोनों के बीच..??क्या उम्र का लिहाज भी नहीं रखा..??जानते तो हो वो एक अलग मजहब की है..??घर पर क्या बताओगे..??शादी तो हो गई फिर अब ये कैसे हो सकता है..??लोग पूछेगें तो उनसे क्या कहोगे..?? इज्जत निलाम नहीं हो जाएगी तुम्हारी..??इतने सवाल… इतने सवाल… इतने सवाल…. सिर्फ एक एहसास के लिए… प्यार का एहसास… इतना खूबसूरत एहसास… जिसमें न जन्म का बंधन होता है, न उम्र की सीमा जैसे की जगजीत सिंह ने अपनी ग़ज़ल में कहा है… “न उम्र की सीमा हो, न जन्मों का हो बधंन.. जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन… “प्यार तो ज़िंदगी का सार है, दुनिया में प्यार जैसी खूबसूरत बात ही नहीं, प्यार वो है जो किसी शक्स को ज़िंदगी के बेहद करीब ले आता है।

उसे निखारता है इस एहसास पर इतने सारे सवाल, आखिर क्यों??प्यार तो एक उड़ान है, एक ऐसी उड़ान जिसमें हर इंसान कैद होना चाहता है मगर जब वो उड़ान भरने लगता है तो ये ही सवाल उसके पंख काट देते हैं। ज़मीन पर खड़ा वो उस आसमान को तकता रहता है जहां उसे अपने हमपरवाज के साथ मिलना था।

साथ में एक उड़ान भरनी थी मगर हमने उसके पंख काट दिए।कौन लगता है दिलों पर रिश्तों के ताले लोग, समाज, दुनिया यानि हम… कौन कहता है कि पहले इस रिश्ते को एक नाम दो.. लोग, समाज, दुनिया यानि हम… हम ऐसा क्यों करते हैं शायद हम इस एहसास से अभी दूर हैं या फिर हमें हमारा प्यार नहीं मिला, लेकिन ये क्या बात हुई…. हमें ऐसा क्यों लगता है कि अगर हमें प्यार हुआ है तो हमें अंजाम देना जरूरी है.. हिन्दी फिल्म गुमराह के संगीत में भी संगीतकार महेन्द्र कपूर ने कहा है “ वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा।” 

उसे ये बताने के लिए कि वो हमे कितना अच्छा लगता है, हमें उससे कुछ वादें करने होगें, उससे शादी करनी होगी… मगर ये कानून किसने बनाए.. लोग, समाज, दुनिया यानि की हम… किसी के प्यार पर सवाल उठाने से हम किना पाप करते हैं। उसके प्यार के बीच एक कांटा बन जाते हैं। गुलज़ार साहब ने कहा है कि “सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो… प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो!!”

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