• Kanika Chauhan

अंजान राहें !!!!!!

चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर, मिला था हमें कोई प्यारा सा उन्हीं राहों पर…. भटक रहें थे जब हम उन राहों पर, मिला था तभी वो हमें उन राहों पर…. खुश हुए थे हम बहुत उस से यूँ मिल कर, चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर!!!!!!!

वो रातें भी अपनी सी लगने लगी थी, उस से यूँ मिलकर लगा कोई था ऐसा जिसकी बातों में हम खो जाते थे…. डूब जाते थे हम उसकी बातों में कुछ इस तरह, चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर!!!!!!

कोई था जो न जाने क्यों अपना सा लगता, कोई था जो बहुत प्यारा सा लगता…. कोई है जिसे हम आज भी याद करते हैं, कोई है जिसे हम आज भी प्यार करते हैं…. पर वो कोई न जाने अब कहाँ है पता नहीं कहाँ खो गया उन अंजान राहों पर!!!!!

नहीं जानते वो कैसा होगा, फिर दुबारा क्यों ये राहें आंजन सी लगती हैं चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर!!!!!!

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